तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीति में आज एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। कांग्रेस नेता वी डी सतीशन सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले सतीशन का सफर संघर्ष, संगठन क्षमता और मजबूत राजनीतिक समझ का उदाहरण माना जाता है। खास बात यह है कि अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती दौर में विधानसभा चुनाव हारने वाले सतीशन आज राज्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।
कॉलेज राजनीति से चमकी नेतृत्व क्षमता
कोच्चि के तेवरा स्थित सेक्रेड हार्ट कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही वी डी सतीशन छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए थे। उनके करीबी बताते हैं कि कॉलेज के दिनों से ही उनमें नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक रणनीति बनाने की अद्भुत समझ दिखाई देती थी। 1980 के दशक में कॉलेज राजनीति के दौरान उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
उनके मित्र रंजीत तंबी, जो पिछले चार दशक से उन्हें करीब से जानते हैं, बताते हैं कि छात्र संघ चुनावों के दौरान ही यह साफ हो गया था कि सतीशन भविष्य में बड़ी राजनीतिक भूमिका निभाएंगे।
1996 में पहला चुनाव हारे, फिर की दमदार वापसी
वी डी सतीशन ने छात्र राजनीति में लगातार सक्रिय रहने के बाद 1990 के दशक में चुनावी राजनीति में कदम रखा। हालांकि 1996 में उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव गंवा दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
सतीशन ने 2001 में जोरदार वापसी करते हुए पारवूर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद यह सीट उनका मजबूत राजनीतिक गढ़ बन गई और उन्होंने राज्य की राजनीति में लगातार अपना प्रभाव बढ़ाया।
साधारण परिवार से निकलकर पहुंचे सत्ता के शिखर तक
एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले वी डी सतीशन का राजनीति से कोई पारिवारिक संबंध नहीं था। इसके बावजूद परिवार ने हमेशा उनका समर्थन किया। उनके भाई-बहन आज भी कोच्चि के नेटूर इलाके में साधारण जीवन जीते हैं और राजनीतिक चकाचौंध से दूर रहते हैं।
सतीशन ने राजनीति के साथ-साथ कानून की पढ़ाई भी की और केरल हाईकोर्ट में वकालत कर चुके हैं। परिवार और करीबी लोगों को हमेशा भरोसा था कि वह कांग्रेस में बड़ी जिम्मेदारी तक जरूर पहुंचेंगे, लेकिन बहुत कम लोगों ने सोचा था कि वह एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे।
दृढ़ इच्छाशक्ति ने दिलाई अलग पहचान
करीबी लोगों के मुताबिक, सतीशन बचपन से ही बेहद दृढ़ निश्चयी रहे हैं। किसी भी काम को पूरा करने की उनकी क्षमता उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थी। छात्र जीवन में वह पढ़ाई, बहस और राजनीतिक गतिविधियों में समान रूप से सक्रिय रहे।
उनके शिक्षकों के अनुसार, सतीशन एक अच्छे वक्ता, गंभीर पाठक और कुशल छात्र नेता थे। राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में भी शानदार प्रदर्शन किया।
व्यक्तिगत रिश्तों को देते हैं खास महत्व
वी डी सतीशन के करीबी लोगों का कहना है कि राजनीति में लंबा सफर तय करने के बावजूद उन्होंने अपने निजी रिश्तों और जड़ों को कभी नहीं छोड़ा। वह अपने माता-पिता से बेहद भावनात्मक रूप से जुड़े रहे और परिवार को हमेशा प्राथमिकता देते हैं।
उनके दोस्त बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने की तैयारी के बावजूद सतीशन का एक बड़ा हिस्सा आज भी नेटूर की उन्हीं गलियों और तेवरा कॉलेज के दिनों से जुड़ा हुआ है, जहां से उन्होंने राजनीति के गुर सीखे थे।
आज लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ
केरल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब वी डी सतीशन राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं। उनके शपथ ग्रहण समारोह को लेकर राजनीतिक हलकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कांग्रेस और यूडीएफ कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि सतीशन के नेतृत्व में राज्य की राजनीति में नई दिशा देखने को मिलेगी।
